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विज्ञापन

💐आलेख विज्ञापन    विज्ञापन अर्थात प्रचार प्रसार का एक तरीका  l जो दृश्य,श्रव्य और पठन सभी रूपों में हमारे सामने आता है l आज के युग को अगर हम विज्ञापन का युग कहे तो यह अतिशयोक्ति न   होगी  l   अखबार से लेकर पत्र-पत्रिकाओं,रेडियो से लेकर टेलीविजन,टेलीविजन से लेकर मोबाइल तक जहां तक हमारी नजर जाती है l यहां तक कि घरों की दीवारों पर खंभों पर जहां कहीं भी हम देखें हमें विज्ञापन ही विज्ञापन नजर आते हैं l इनकी भी कई वैरायटी है l कहीं गुमशुदा विज्ञापन, कहीं शादी के लिए वर वधू का विज्ञापन, कहीं प्रॉपर्टी लेनदेन का विज्ञापन, पुस्तकों का विज्ञापन, प्रदर्शनी यों का विज्ञापन, डॉक्टर- वैद्य, नीम- हकीम, ऐसी दुनिया में कौन सी चीज है जो वर्तमान में विज्ञापन का विषय नहीं है  l इस तरह से हम जहां कहीं भी देखते हैं जाने अनजाने में किसी ने किसी चीज का विज्ञापन देखते सुनते और करते हैं  l इसीलिए यदि हम आज के वर्तमान युग को विज्ञापन का युग कहे तो यह अतिशयोक्ति न होगी l विज्ञापन ही है जिसकी वजह से चीजों का प्रचार-प्रसार बहुत तेजी से हो पाता है l इसने हमारी जिंदगी...

जीवन की चौपाई

💐जीवन की चौपाई उन्नति का शिखर अगर चाहो, आचरण शुद्ध रखना होगा l सुन प्यारे आलस को त्यागो, कर्म पथ पर  बढ़ाना होगा l   पथिक तुम कभी हार न मानो,   गिरकर फिर संभलना होगा l गर मजबूत  इरादा होगा, पर्वत को भी झुकना होगा l इत्र की महक बनना चाहो, पुष्प की तरह मिटना होगा l वह तो तुझे तरास रहा है, निखरना चाहो तो  चोट सहना होगा l जीवन तो एक संघर्ष है, संघर्ष तुझे जितना होगा l हालात का रोना न रोना, हालात को बदलना होगा l आँख डाल देखो आँखों  में, खुद को तुझे समझना होगा l वह तुझसे तो जुदा नहीं है, खुद में तुझे ढूंढना होगा  l लोकेश्वरी कश्यप मुंगेली छत्तीसगढ़ 27/11/2022

स्वदेशी

💐विषय  -  स्वदेशी आज का युग आधुनिक युग है  l आज का जनमानस आधुनिकता की अंधी दौड़ में इतना पागल हुआ जा रहा है कि वह अपने पुरातन सभ्यता संस्कृति की महिमा गौरव और उपयोगिता को नजरअंदाज करने में तनिक भी देर नहीं लगाता l आधुनिकता के नाम पर उद्दंडता और फूहड़ता को अपनी शान समझने लगा है l आज की युवा पीढ़ी स्वदेशी का मूल्य व महत्व भूल रही है l आज स्वदेशी के नाम पर मात्र कुछ प्रोडक्ट को ही गिना जाता है l वास्तव में स्वदेशी का अर्थ बहुत व्यापक स्तर पर हम सब को समझने की आवश्यकता है l हम सभी को चाहिए कि हम अपने देश में निर्मित वस्तुओं का अधिक से अधिक उपयोग करें ताकि हमारे देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़े और रुपए का मूल्य भी बढ़े l जब हम स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करेंगे तो ना सिर्फ हमारे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी बल्कि हमारे देश के लोगों का जीवन स्तर भी ऊंचा होगा एवं उन उद्योग धंधों में काम करने वाले हमारे देश के लोगों को रोजगार भी अधिक से अधिक मिलेगा l जब हम अपने देश में बनने वाले सामानों का उपयोग अधिक करेंगे तो उसकी मांग बढ़ेगी और मांग बढ़ने से उत्पादन अधिक होगा एवं उसकी प्रसिद...

मकड़ी का झूला

🕷️कहानी शीर्षक - मकड़ी का झूला बहुत समय पहले की बात है l पहले मकड़िया चीटियों की तरह चलती थी l उनको जाले बनाना नहीं आता था l जब मकड़ी आप पक्षियों को पेड़ों की टहनियों, पत्तियों,शाखाओं में झूलते देखती थी l बंदरों को पेड़ों पर इस पेड़ से उस पेड़ पर झूलते देती थी l तो उन्हें बहुत अच्छा लगता था l उनका भी मन करता था कि,काश वह सभी पक्षियों और बंदरों की तरह झूला झूलने का आनंद ले पाती l एक दिन सभी मकड़ियों ने सभा बुलाई l सब ने यह तय किया कि वे ब्रह्मा जी की तपस्या करेंगी l उन्हें प्रसन्न करके उन सबकी यह इच्छा पूरी करने का निवेदन करेंगी l सभी नन्हीं नन्हीं मकड़ियों ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या शुरू की   l पेड़ों की शाखाओं पर एक टांग पर खड़ी होकर तपस्या करनी शुरू की l इस तपस्या के दौरान कई मकड़िया पेड़ों की शाखाओं से गिरकर मर गई l पर बाकी मकड़ियों ने अपनी तपस्या जारी रखी l मकड़ियों के हाथ पांव तपस्या की वजह से सूखकर पतले - पतले हो गए l आखिरकार ब्रह्मा जी को उन सब पर दया आ गई l ब्रह्मा जी ने जब उनसे वरदान मांगने को कहा तो मकड़ियों ने अपनी इच्छा ब्रह्मा जी को बताइ l...

गंगा माता

💐शीर्षक : गंगा माता हे जगत पावनी निर्मल गंगा माता , जो भी पतित जन तेरे दर पर आता l जन्म भर का पाप उसका उतर जाता, अद्भुत शांति वह प्राणी निश्चित ही पाता  l तेरे निर्मल जल में अद्भुत शक्ति है माता , तुम विष्णुपदी,शिव से भी है तेरा नाता l शिव ने अपनी जटाओं में तुझको बांधा, शिव के सिवा तेरा वेग कोई संभाल न पाता  l तुम हिमालय से लेकर आती हो माता, जड़ी बूटियों का सत सारा वह खजाना l तेरी किनारों पर विकसित हुई सभ्यता, उपजाऊ मिट्टी तेरा जल बहाकर लाता l पतित पावनी,पाप नाशिनी गंगा माता, तेरे स्पर्श से जन का तन मन पावन होता  l जानवी,मंदाकिनी,भागीरथी,अलकनंदा, है तेरे अनेकों नाम तुझ में अद्भुत क्षमता  l तेरा शीतल जल,प्राणि का संताप मिटाता, जिंदा क्या मुर्दा भी तेरे जल से तर जाता l तेरे जलसे शिव का अभिषेक जो करता, हर कामना होती पूर्ण मनवांछित फल पाता l लोकेश्वरी कश्यप मुंगेली छत्तीसगढ़ 09/11/2022

तेरी मुस्कान

💐शीर्षक - तेरी मुस्कान तेरी मुस्कान सबसे प्यारी है l तू हम सबकी प्राण दुलारी है l तू ही हमारी दुनिया सारी है l माँ तुझ पर बलिहारी है  l तेरी सुंदर आँखें कजरारी है l   तू जग में सबसे न्यारी है l हमनें जान तुझ पर न्योछारी है l तू हमको प्राणों से भी प्यारी है l एक तेरा प्रेम सब पर भारी है  l तेरे लिए छोड़ी दुनियादारी है  l एक पल दूरी में भी बेकरारी है l सदा साथ रहने की तैयारी है l तू वह नन्हीं सी क्यारी है l जिससे महकी घर फुलवारी है l तू मेरी नन्ही राजदुलारी है l तेरी मुस्कान सबको प्यारी है l तेरे दांतो की पंक्ति न्यारी है  l हंसी जैसे झड़ती फूलों की डाली है l तेरी मोहनी सूरत मतवाली है l हमारी दुनिया तुझसे वारी न्यारी है  l लोकेश्वरी कश्यप मुंगेली छत्तीसगढ़ 10/11/2022

राम नाम

💐शीर्षक - राम नाम भज ले रे मन राम का नाम l करते-करते अपने सारे काम l राम नाम से मिलता आराम l जग में पावन है राम का नाम l श्याम सलोने रूप के धाम l ले अभिराम राम का नाम l राम नाम की अद्भुत महिमा l भज के देख ले तू राम नाम l मर्यादा के धाम सिया के राम l जोर से बोल बंदे सियावर राम l मोक्ष दिलाए राम का नाम l उत्तम जोड़ी सीताराम सीताराम l सुख मिलता मन को अपार l जब हम लेते राम का नाम l सीता शोभा पाये राम के वाम l अयोध्या हो गई साकेत धाम l राम नाम से मिले सदा आराम l जप ले मन सीताराम सीताराम l मेरे भी मन में बस जाओ राम l सुबह शाम भजूं बस तेरा नाम l लोकेश्वरी कश्यप मुंगेली, छत्तीसगढ़ 12/11/2022