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मेरा भारत महान

🙏🏻शीर्षक : मेरा भारत महान अनेकता में एकता, हमारे देश की पहचान है l अलग-अलग भाषा,धर्म,संस्कृति इसकी शान है l मेरा भारत महान है l सर पर इसके मणीमुकुट सा हिमालय का ताज है l चरणों की वंदना में अरब सागर, बंगाल की खड़ी,हिन्द महासागर है l मेरा भारत महान है l पूरब में भारत माता का लहराता सतरंगी आँचल है l पश्चिम में आशीष वरमुद्रा दहाड़ते सिंह का गर्जन है l मेरा भारत महान है l नदियां प्यारी सारी इसकी,मानो नसों का जाल है l बीच कमर में, पर्वतों की करधनियाँ भी कमाल है l मेरा भारत महान है l  तरह-तरह के वन और उपवन इसके सोलह श्रृंगार है l  तरह तरह के ज्ञान-विज्ञान,रत्न, औषधियों का भंडार है l मेरा भारत महान है l भारत का गणतंत्र विश्व का सबसे बड़ा गणतंत्र है l सब यहाँ जाति,धर्म,भाषा,शिक्षण, विचार के लिए स्वतंत्र है l मेरा भारत महान है l  खुशी मनाने के लिए यहां हजारों तीज और त्यौहार है  l  दुश्मनों से लोहा लेने के लिए भी वीर सदा तैयार हैं l मेरा भारत महान है l  लोकेश्वरी कश्यप जिला मुंगेली,छत्तीसगढ़ 26/01/2022  (प्रमाणित किया जाता है कि यह मेरी स्वरचित और मौलिक रचना है )

सुभाष चंद्र बोस

🙏🏻शीर्षक  : सुभाष चंद्र बोस 23 जनवरी को जन्म हुआ, उड़ीसा के कटक में  l जाने गये नेताजी के नाम से,सुभाष पूरे विश्व में l देशभक्त,वीर सेनानी, रहते थे सदा पूरे जोश में l तेज था पिता जानकीनाथ,मां प्रभावती के पालन में l  देश प्रेम,साहस,स्वाभिमान की भावना बचपन से l  लगे रहे सदा ही भारतीयों को एकजुट करने में  l  आजाद हिंद फौज को गढ़ा जापान के सहयोग से l  राष्ट्र के लिए स्वतंत्रता सर्वोपरि,भिज्ञ इस मूल मंत्र से l सहे कारावास के कठोर दंड,स्वतंत्रता संग्राम में l  डटे रहे सुभाष सदा देश के आन,बान,सम्मान में  l प्रेरित रहे विवेकानंद और अरविंद घोष के काम से l अंग्रेजों को नाको चने चबाये,जापान,जर्मनी के साथ से l  जय हिंद के नारे से जोश भरते रहे हिंदुस्तानियों में l  तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा,नारा गूंजा आसमान में l पूरा जीवन झोंक दिया उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में l अनेकों दंड,कारावास,कष्ट सहते रहे इस दौरान में l प्रेरित किया युवाओं को सुभाष ने अपने कर्मों से l देश हित में कार्य करते रहे,ऊपर उठ सब धर्मों से l देश आहत,उनके विमान दु...

विद्या दान

💐शीर्षक : विद्या दान 💐 विद्या दान गुरु है करता,  शिष्य की झोली ज्ञान से भरता  l  गुरु होता है बड़ा उपकारी,  दूर करे अज्ञानता हमारी  l गुरु पर मैं जाऊं बलिहारी,  सच्चा गुरु ही है हितकारी l  इस बात में नहीं कोई दो राय,  गुरु का लोहा माने दुनिया सारी l  गुरु की महिमा वेदों ने भी गाई ,  बात नहीं किसी ने  ये झूठ लाई l  गुरु का तब ही मान बढ़े भाई, जब विद्या पाकर हम करें भलाई l लोकेश्वरी कश्यप जिला मुंगेली, छत्तीसगढ़

राधिका 🙏🏻

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राधिका  राधिका एक सीधी-सादी गांव की लड़की थी. उसके माता पिता शहर में कमाने गए. राधिका भी अपने भाई और माता पिता के साथ शहर गई. उसके पिता ने उसका दाखिला एक बहुत अच्छे से स्कूल में करा दिया. राधिका और उसका अभी स्कूल जाने लगे. राधिका गांव से गई थी उसे हिंदी बोलना अच्छे से नहीं आता था. उसके स्कूल के बच्चे उसका बहुत मजाक उड़ाते थे कि उसे अच्छे से बोलना नहीं आता है. उसे चिढ़ाते थे. की राधिका गवार है, उसे कुछ नहीं आता, वह क्या जाने कि अच्छे से पढ़ना और लिखना उसे तो मैडम की बात भी समझ में नहीं आएगी. पर राधिका उनसे कभी पलट कर कुछ ना कहती थी बस चुपचाप उनकी बातें सुन लेती थी.  राधिका बहुत समझदार और मेहनती लड़की थी. उसकी हर चीज को सीखने की और जानने की जिज्ञासा कमाल की थी. जब मैडम क्लास में पढ़ाती थी तो वह बड़े ध्यान से सुनती थी.   क्योंकि राधिका जानती थी कि इस शहर में जब कोई उससे दोस्ती नहीं करना चाहता, कोई से बात नहीं करना चाहता, तो एकमात्र किताबे ही हैं जो उसकी सच्ची  साथी बन सकती है. राधिका जी जान से पूरी मेहनत के साथ जुट गई अपनी सच्ची साथी के साथ अपना समय बित...

नदी या जल स्त्रोतों में अस्थियो का विसर्जन की परम्पराऔर विज्ञान

शक

शक  दो अक्षर का यह साधारण साधारण सा शब्द अपने में कितना गूढ़ रहस्य समाए  हुए हैं l इसके ऊपर जाने कितनी बातें कहीं गई हैं और कितने पन्ने रंगे गये हैं lइसके ऊपर जाने कितनी जिंदगियां भेंट चढ़ गई l यह ऐसा असाध्य रोग हैं, जो अगर किसी को हो जाएं तो उसका जीवन धीरे -धीरे नरक बना देता हैं l कमाल की बात यह है कि जिस से यह रोग होता है उसे पता भी नहीं चलता कि कब और कैसे धीरे -धीरे उसकी जिंदगी के सारे सुखचैन हवा हो जाते हैं l यह शक कभी अकेले नहीं आता l यह अपने साथ में अपनी सहचरी को भी लाता है l जी हां ठीक समझे! इसकी सहचरी है भय,भ्रम और क्रोध l जिस व्यक्ति को सबका असाध्य रोग लग जाता है l वह सदा भय से ग्रसित,भ्रमित और क्रोधित रहता है l हमेशा उसके मन में एक अनजाना भय बना रहता है और यही है उसे भ्रमित करते रहता है एवं उसके क्रोध को अंदर ही अंदर सुलगाते रहता है l धीरे-धीरे उसके सारे सुखचैन उसकी खुशियां इस निष्ठुर शक  की भेंट चढ़ जाती है l  स्नेक की कोशिका असाध्य रोग लगता है वह तो तन मन आत्मा से रोगी हो ही जाता है l उस व्यक्ति के साथ-साथ उसके साथ रहने वाले व्यक्ति भी इस रोग की पीड़ा और त...

नव वधू का आगमन

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शीर्षक :- नव वधू का आगमन हल्दी लगी,सेहरा सजा मेरे बेटे का l बारात सजी,हुईं शादी, पड़ी भाँवरे l  रस्मो रिवाजो से हर्षित सबका मन l हुआ घर मेरे सुभागमन नव वधू  का l जब घर में इधर-उधर जाया करती थी l छन- छन छनकती थी उसकी पायल l खन -खन खनकती थी उसकी चूड़ियाँ l रुनझुन -रुनझुन बजती थी करधनिया l घर में हर तरफ बहार सी छा गई , जब हुआ घर मेरे वधू का आगमन l समय मानो पंख लगाकर उड़ने लगा l उसकी मीठी बोली से घर गुंजनें लगा l बरस भर में पोते की किलकारियां गूंजने लगी l समय कब करवट ले ले जानता कौन भला l जिसके लिए हम भी थे उसके अपने माँ -बाप l अब हम हो गये उसके लिए बुड्ढे और बुढ़िया l हमारी जरूरतें अब बोझ बनकर रह गई l माँ -बाबूजी उसके मुँह से सुनने कान तरस गईं l जिसे हमने चाहा टूटकर बेटी की तरहा, जाने क्या अपराध हुआ हमसे, जो वह बदल गईं l जाने कब हम बरामदे के कोने में सिमट गये l नन्हा पोता हमारा बहुत बडा हो गया l बेटियां सब अपने घर ससुराल चली गई l यमपुरी ले जाने अब यमराज भी आकर खड़ा हो गया l लोकेश्वरी कश्यप जिला मुंगेली छत्तीसगढ़