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मर्यादा

शीर्षक : मर्यादा हर एक  का सम्मान करो l मर्यादा में रहकर सारे काम करो l धरती मर्यादित, अंबर मर्यादित, मर्यादा में रहती है ये प्रकृति l जिस दिन मर्यादा टूटी इनकी, उथल -पुथल हो जाती है सृष्टि l सरिता मर्यादा में जब रहती, समृद्धि पाते इसके तट के वासी l जब ये मर्यादा तोड़े अपनी, हस्ती मिटाकर सब बहा ले जाती l सूरज, चंदा मर्यादित,नक्षत्र मर्यादित, मर्यादा में रहता ब्रम्हाण्ड सारा l मर्यादा में रहता सागर खारा l स्वच्छंदता को मत कहो स्वतंत्रता, मर्यादाहीन होती स्वच्छंदता, जाने हैं यह सकल जहान  l मर्यादित रहती है स्वतंत्रता l नर और नारी सब रहे मर्यादित, मर्यादा में रहकर सारे काम करो l मर्यादा में सुख समृद्धि सुंदरता का वास  l  मर्यादा में सब के सुर और ताल रहे, मर्यादा का सम्मान सदा हो, सबको ही यह ध्यान रहे  l मर्यादा का अर्थ समझाने स्वयं प्रभु धरा पर आए l कठिन परिस्थितियों में भी, जिन्होंने मर्यादा के धर्म निभाएं  l  मर्यादा पैरों की बेड़ियां नहीं है, मर्यादा सम्मान और सुरक्षा है l मर्यादा को कमजोरी ना समझो ऐ दुनिया वालों, अमर्यादित होकर खुद को ना यूँ, पतन की आग...

व्यथित हूँ

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🙏🏻देख कर मैं व्यथित हूं.......  👉 पीड़ा में तड़पते हुए अपनों को, टूट कर बिखरते हुए सारे सपनों को,  देख कर मैं व्यथित हूं........... 👉निस्तब्ध,स्तंभित की वेदनाओ  को, साथ ही लोगों की असंवेदनाओं को, देखकर मैं व्यथित हूं............. 👉पर पीड़ा में अवसर तक रहे लोगों को,सांसो की कालाबाजारी करते सौदेबाजों को, देख कर मैं व्यथित हूं................ 👉उन्होंने देखा था  लाशों पर चढ़कर आजादी आई थी,  हम देख रहे  आज लाशों पर गरमाई तुच्छ राजनीति को,  देख कर मैं व्यथित हूं................. 👉 अब तो जिंदगी और मौत पर भी आरक्षण का दांव चल रहा,  हमारी ही आस्तीन में जाने कब से  फरेबी  सांप पल रहा,  देख कर मैं व्यथित हूं............... 👉 कोई तरस रहा हवा को तो कोई तरस रहा दवा को,  पर क्या फर्क पड़े देश के लापरवाहो को,गद्दारों को, देख कर मैं व्यथित हूं............... 👉लोग पढ़ लिखकर परंपराओं संस्कारों से दूर हो गए,  सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे भद्राणि पश्यंतु के भाव अब लुप्त  हो गए,  देख कर मैं व्यथित हूं.............. 👉...

अब तस्वीर बदलनी होगी

💐तस्वीर  हर तरफ फैला झूठ,  फरेब,  अत्याचार  l  बहू -बेटियों का घर से निकलना हुआ दुश्वार l  चारों ओर बढ़ रहा बेहिसाब दुराचार l सबको मिलकर अब यह तस्वीर बदलनी होगी l  हर तरफ लूट है, मच रहा हाहाकार l  कहीं युद्ध,कहीं षड्यंत्र का गर्म है बाजार l अकेले निपट नहीं सकती कोई भी  सरकार l  सबको मिलकर यह तस्वीर बदलनी होगी l हो कही  कुछ गलत, और अत्याचार l एक दूजे पर दोषारोपण करना है बेकार l बिना डरे हमको करना होगा प्रतिकारl सबको मिलकर यह तस्वीर बदलनी होगी l कब तक अपनी जिम्मेदारी से बचने ढूंढेंगे राह l सच्चाई को अब  दिल से करें स्वीकार l  आपने लिए स्वयं ही बनना होगा हमें  तारणहार l सबको मिलकर यह तस्वीर बदलनी होगी l  षडयंत्रो कि विभीषिका में जल रहा संसार l प्रकृति कब तक झेले मानव रूपी दानव  के अत्याचार l इसलिये पड़ रही अब प्रकृति कि भी मार l सबको मिलकर यह तस्वीर बदलनी होगी l  बंद करो यह युद्ध,छल, पाप, दुराचारl शांति, प्रेम, समृध्दि का करो मिलकर सम्मान l बनाये इसे ही हम अपने जीवन का सार  l  सबको बांटे प्यार तब...

मेरा अस्तित्व

💐शीर्षक : मेरा अस्तित्व  मैं नारी हूं,  नारीत्व मेरा अस्तित्व है l  मैं मां हूं, ममत्व ही  मेरा अस्तित्व है l  मैं बेटी हूं,स्वाभिमान मेरा अस्तित्व हैl पर इनसे परे भी मेरा स्वतंत्र अस्तित्व है l मैं बहन हुँ,सौहाद्र मेरा अस्तित्व है l मैं पत्नी हुँ,सहधर्मिता मेरा अस्तित्व हैl मैं बहु हुँ, मर्यादा मेरा अस्तित्व है l  पर इनसे परे भी मेरा स्वतंत्र अस्तित्व है l मैं शिक्षिका हुँ,शिक्षण मेरा अस्तित्व है l मैं वैद्य हुँ,सेवा मेरा अस्तित्व है l मैं लेखिका हुँ,रचनात्मकता मेरा अस्तित्व है l पर इनसे परे भी मेरा स्वतंत्र अस्तित्व है l मैं भक्त हुँ, भक्ति मेरा अस्तित्व हैl  मैं शक्ति हुँ,  सामर्थ मेरा अस्तित्व है l  मैं लक्ष्मी हूं, ऐश्वर्य मेरा अस्तित्व हैl पर इनसे परे भी मेरा स्वतंत्र अस्तित्व है l  मैं एकता हूं, बंधुत्व मेरा अस्तित्व हैl  मैं मुक्ति हूं, विरक्ति मेरा अस्तित्व हैl  मैं युक्ति हूं, बुद्धि मेरा अस्तित्व है l पर इनसे परे भी मेरा स्वतंत्र अस्तित्व है l  मैं नेत्र हूं, दर्शन मेरा अस्तित्व है l  मैं ध्वनि हूं,एकाग्रत...

प्रकृति के कण- कण में है संगीत

🎉शीर्षक : संगीत    पक्षियों के कलरव में है संगीत l मोहन के मुरली में  है संगीत l  निर्झर के झर झर में है संगीत l  प्रकृति के कण-कण में है संगीत  l  कटु- मधुर वाणी में है संगीत l  हवा के झोंकों में है संगीत  l  अग्नि की चटक में है संगीत  l  प्रकृति के कण-कण में है संगीत  l  जल के कल कल में है संगीत l  बारिश की बूंदों में है संगीत  l  सागर की लहरों में है संगीत  l  प्रकृति के कण-कण में है संगीत  l  पायल की छन छन में है संगीत l  चूड़ी की खन खन में है संगीत l दिल की हर धड़कन में है संगीत l  प्रकृति के कण-कण में है संगीत  l  बच्चों की किलकारी में है संगीत  l  हाथों की बजती हुई ताली में है संगीत l  भूखे की बजती थाली में है संगीत l  प्रकृति के कण-कण में है संगीत  l  पत्तों की सरसराहट में है संगीत l  भौरों की गुनगुनाहट में है संगीत l  अपनों की आहट में है संगीत l  प्रकृति के कण-कण में है संगीत  l  मां की प्यारी लोरी म...

कविता

💐शीर्षक : कविता  तारों भरी रात है कविता  l शब्दों भरी जज्बात है कविता l नदियों सी लहरती है कविता l सबको लुभाती हैं कविता l शब्दों की शोभा हैं कविता l मुखड़े की आभा हैं कविता l माँ की ममता हैं कविता l नारी का सौंदर्य हैं कविता l कवियों की  दुलारी है कविता l जग में सबसे न्यारी है कविता l सबको प्यारी होती है कविता l बच्चों की मुस्कान सी है कविता l फूलों की खुशबु है कविता l रंगों की भरमार है कविता l मन में उठती हिलोर है कविता l मन से मन की डोर है कविता l सर्दियों की धूप है कविता l अमराई की छाँव है कविता l मिश्री की मिठास है कविता l अरमानों भरी उड़ान है कविता l भौंरे की गुनगुनाहट है कविता l चिड़ियों की चहचहाहट है कविता l झरने का ठंडा पानी है कविता l रचनाओं की रानी है कविता l गीतों भरी कहानी है कविता l चढ़ती हुई जवानी है कविता l गागर में सागर समाती है कविता l भावों से भर भर जाती है कविता l लोकेश्वरी कश्यप जिला मुंगेली छत्तीसगढ़ 21/03/2022

प्रेम विरह

💐प्रेम विरह की ज्वाला में, तन, मन, काठ सा जल जाय l जितनी ये अगन बढ़े दिल में, उतनी प्रेम परवान चढ़ जाय l खींची चली बंशी की धुन में, राधा, गोपियाँ सुध -बुध भुलाय l गोपियाँ डूबी प्रेम विरह में, छलिया कान्हा मंद -मंद मुस्काय l ऐसी लगन लगी कृष्णा में, मीरा घूमे जग में जोगन कहाय l भूल गयी सब कुछ प्रेम में, बस मोहन में ही ध्यान लगाय l प्रेम विरह की इस आग में, मान - मर्यादा कहीं ना मिट जाय l प्रेम आदर्श सदा रहे जग में, इसका सम्मान ना कहीं घटने पाय l जिसने भी प्रेम किया जग में, जालिम दुनियाँ उसे रही सताय l कृपा करो भोले नाथ जी, विरही प्रेमी आपस में मिल जाय l लोकेश्वरी कश्यप जिला  मुंगेली, छत्तीसगढ़ 20/03/2022