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अगर कलम न होती तो

🙏🏻शीर्षक - अगर कलम न होती जाने कितनी बाते अधूरी रह जाती, जाने कितने गीत अधूरे रह जाते l मन की बात मन मे ही घुट जाती, अंतस की पीड़ा उढ़ेलने वाले न होते l अगर कलम न होती तो.... मानो पंछी के पंख कुतर जाते, इंद्रधनुष के रंग बिखर जाते l दिल के अरमान हवा हो जाते, दिलों के जज्बात पन्नो मे उतारें न जाते l अगर कलम न होती तो....... किस्से न होते, फ़साने न होते, अनुभवों को पिरोने वाले न होते l पुष्प होते गुलशन मे लाखों, पर उनपे मंडराते भौंरे दीवाने न होते, अगर कलम न होती तो....... हुस्न तो होता पर प्रेयसी को, चाँद की उपमा देने वाले न होते l गुमनाम होते सारे किस्से, कहानियाँ, इनके सुनाने वाले न होते l अगर कलम न होती तो.... सुबहो -शाम, मौसम का हर अंदाज, कभी तोता - मैना को रुमानी न लगते l बागों मे बहारे तो जरूर आती, बहारो का अंदाजे बयाँ करने वाले न होते l अगर कलम न होती तो........ टूट जाते जाने कितनो के हौसले, गर उनके पास हौसला देने वाले न होते l वेद,श्रुतियाँ गुमनामी के अंधेरों मे खो जाती, आज श्रुत परम्परा कहाँ तक साथ निभाते l अगर कलम न होती तो........ बहुत कुछ जहाँ मे सबके लिए अंजाना होता, न ख़त होत...

मतदान जागरूकता गीत (छत्तीसगढ़ी )

🙏🏻मतदान जागरूकता गीत (छत्तीसगढ़ी मे ) मेरी स्वरचित गीत 🙏🏻🙏🏻 (जतन करव रे मैं माटी महतारी अव सुख-दुख के संग रहिया संगवारी अव तर्ज पर) मतदान करव रे...मतदान करव रे..... मैं तुहर अधिकार तुहर हामी अव...... हामी अव..... मतदान करव संगी, जाके मतदान करव रे... (कोरस ) मतदान करके संगी छाती अपन जुड़ा लव l मतदान के महत्व संगी ल जग ल बता दव l मैं तुहर मताधिकार के चिन्हारी मैं तुहर संगी अव...... मतदान करव रे... मतदान करव रे... मैं तुहर आधिकार, तुहर हामी अव देश के कोनो रक्षक नेता ल जाके जीता लव l अपन देश के  गनतंत्र ल जावव बचा लव l मैं तुहर  अंतस के अवाज, तुहर मन के बानी अव..... मतदान करव रे... मतदान करव रे... मैं तुहर अधिकार, तुहर हामी अव.... सब्बो काम बुता ल छोड़ के तुमन जावव l अपन अंगठी म मतदान के सियाही लगवावव l मैं तुहर परजा तंत्र के रक्षक, तुहर हिरदय के पानी अव...... (पानी = मान, स्वाभिमान, सम्मान ) मतदान करव रे... मतदान करव रे.. मैं तुहर अधिकार तुहर हामी अव.... पाँच साल म आथे ये तिहार, जाके मतदान करव l मतदान तुहर धर्म ये, अपन कर्म तुमन करव l मैं हर तुहर मयारू हितैषी, मैं तुहर अंतस के...

मतदान जागरूकता गीत

🙏🏻मतदान जागरूकता गीत (छत्तीसगढ़ी मे ) मेरी स्वरचित गीत 🙏🏻🙏🏻 (जतन करव रे मैं माटी महतारी अव सुख-दुख के संग रहिया संगवारी अव तर्ज पर) मतदान करव रे...मतदान करव रे..... मैं तुहर अधिकार तुहर हामी अव...... हामी अव..... मतदान करव संगी, जाके मतदान करव रे... (कोरस ) मतदान करके संगी छाती अपन जुड़ा लव l मतदान के महत्व संगी ल जग ल बता दव l मैं तुहर मताधिकार के चिन्हारी मैं तुहर संगी अव...... मतदान करव रे... मतदान करव रे... मैं तुहर आधिकार, तुहर हामी अव कोनो देश के रक्षक नेता ल जाके जीता लव l अपन देश के  गनतंत्र ल जावव बचा लव l मैं तुहर  अंतस के अवाज, तुहर मन के बानी अव..... मतदान करव रे... मतदान करव रे... मैं तुहर अधिकार, तुहर हामी अव.... सब्बो काम बुता ल छोड़ के तुमन जावव l अपन अंगठी म मतदान के सियाही लगवावव l मैं तुहर परजा तंत्र के रक्षक, तुहर हिरदय के पानी अव...... (पानी = मान, स्वाभिमान, सम्मान ) मतदान करव रे... मतदान करव रे.. मैं तुहर अधिकार तुहर हामी अव.... लोकेश्वरी कश्यप छत्तीसगढ़ 29/03/2023

पिता

💐पिता पिता जी आपके आशीष की ठंडी छाँव, अब मूझे कभी कहीं मिलता नहीं l देख लिया कई शहर और गाँव, आपका खालीपन कोई भर सकता नहीं l हमारी हर समस्या का  हल, होता था सदा ही आपके पास l आपने कभी टूटने ही न दिया था, हमारे मन आशा,आस्था और विश्वास l पिता हमारे लिए सच्चे दर्पण थे आप, हमसे कहते तुम हो मेरा अभिमान l पिता जी हममें भरते रहे सारी उम्र, गौरव,आत्मविश्वास और स्वाभिमान l आपके न रहने से सब फीका और खाली, मन का एक कोना हो गया है रिक्त l आपकी गर्विली मुस्कान से खुशी होती दोगुनी, अब छोटा सा गम भी लगता है अतिरिक्त l याद आती है पिता जी आपकी हर मुस्कान, अब कौन  रखें मेरे सुख- दुख का ध्यान l आपके रहते पाया मैंने हर कहीं  सम्मान, अब पहले जैसा नहीं रहा कहीं मेरा मान l लोकेश्वरी कश्यप मुंगेली, छत्तीसगढ़ 29/03/2023 पिता के नाम.............

जलाते जाइए

शीर्षक - दीपक जलाते जाइए चाहे कितनी भी गहरी हो रात ये मुसाफिर, हौसला न खो राह मे दीपक जलाते जाइए l टूटने अगर लगे कभी तेरा / किसी की उम्मीद , रख यकीन उसपे और कदम आगे बढ़ाते जाइए l रिश्तो मे अगर दूरियाँ आने लगी हो कहीं, कड़वाहटें भूल वाणी मे मधुरता बढ़ाते जाइए l हताशाओ से घिरे लोगो के दिलों मे, आशाओं का नन्हा दीप जलाते जाइए l डरे, कुचले, सहमे, शोषितों को और न डरा, बनके उनकी ताकत डर को भगाते जाइए l लोकेश्वरी कश्यप मुंगेली छत्तीसगढ़ 25/03/2023

राह मे दीपक जलाते जाइए

💐गजल - राह मे दीपक जलाते जाइए अँधेरे मे भी उजाले होंगे, राह मे दीपक जलाते जाइए l अपनों से भी ये कैसी दूरियाँ, रूठे अपनों को मनाते जाइए l डरे,कुचले व सहमे जो लोग हैं, उनके उर से डर भगाते जाइए l हौसला खो चुके कुछ मायूस दिल, वहाँ नई उम्मीद जगाते जाइए l हर मुश्किल होगी एक दिन आसान, हाथों से हाथ बढ़ाते जाइए l लोकेश्वरी कश्यप मुंगेली, छत्तीसगढ़ 25/03/2023

नारी

💐शीर्षक नारी मात्रा भार 16 नारी की है महिमा भारी, नारी ऊपर जग बलिहारी l बेटी,बहन,पत्नी,माता हैं हर रूप  लगे इसकी न्यारी l सारे कर्तव्य निभाती हैं, संभालती सदा घर द्वारी l थक कर चूर हो जाती कहीं फिर भी लगती है वह प्यारी  l लोकेश्वरी कश्यप मुंगेली छत्तीसगढ़ 24/03/2023