जी चाहता है

शीर्षक-जी चाहता है 

ओ सांवरे तुझे हद से भी ज्यादा,
चाहने को दिल चाहता है l 

तुम सामने बैठें रहो, 
तुझे मैं जी भर निहारु l
तेरे मुखड़े का दर्शन करुं,
नैनन ज्योति से तेरी आरती उतारू l
ओ मोहना तेरे मोहपाश में,
बंध जाने को जी चाहता है l
ओ सांवरे तुझे हद से भी ज्यादा,
चाहने को दिल चाहता है l 

मैं तेरे मधुर मधुर,
वेणु की धुन में खो जाऊ l
तेरे ही संग डोलू,
तेरे ही संग संग गाऊ l
ओ बावरे मुरलिया बन,
तेरे अधरों से लगने को जी चाहता है l
ओ सांवरे तुझे हद से भी ज्यादा,
चाहने को दिल चाहता है l 

तेरे पैरों की पायल बजे, 
मधुर छनन छन - छन l
तेरे अधरों की मोहनी मुस्कान,
चुराती है मेरा तन मन l
ओ कान्हा तेरे चरणों से,
लिपट जाने को जी चाहता है l
ओ सांवरे तुझे हद से भी ज्यादा,
चाहने को दिल चाहता है l 

तू जो करें मैं वो करुं,
तू जहाँ जाये मैं वहाँ जाऊ l
तू जो हँसे मैं भी हँसू,
तू गाये तो तेरे संग गाऊ l
ओ काले तेरी परछाई,
बन जाने को जी चाहता है l
ओ सांवरे तुझे हद से भी ज्यादा,
चाहने को दिल चाहता है l 

ऋतुओं में तू बसंत,
मैं तेरी सुगंध बन जाऊ l
तेरे बिन कुछ नहीं मैं,
तेरे बिन कहीं मैं न जाऊ l
ओ चितचोर तुझे चित में,
बसाने को जी चाहता है l
ओ सांवरे तुझे हद से भी ज्यादा,
चाहने को दिल चाहता है l 

09/02/2026
लोकेश्वरी कश्यप 
मुंगेली -छत्तीसगढ़

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