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जी चाहता है

शीर्षक-जी चाहता है  ओ सांवरे तुझे हद से भी ज्यादा, चाहने को दिल चाहता है l  तुम सामने बैठें रहो,  तुझे मैं जी भर निहारु l तेरे मुखड़े का दर्शन करुं, नैनन ज्योति से तेरी आरती उतारू l ओ मोहना तेरे मोहपाश में, बंध जाने को जी चाहता है l ओ सांवरे तुझे हद से भी ज्यादा, चाहने को दिल चाहता है l  मैं तेरे मधुर मधुर, वेणु की धुन में खो जाऊ l तेरे ही संग डोलू, तेरे ही संग संग गाऊ l ओ बावरे मुरलिया बन, तेरे अधरों से लगने को जी चाहता है l ओ सांवरे तुझे हद से भी ज्यादा, चाहने को दिल चाहता है l  तेरे पैरों की पायल बजे,  मधुर छनन छन - छन l तेरे अधरों की मोहनी मुस्कान, चुराती है मेरा तन मन l ओ कान्हा तेरे चरणों से, लिपट जाने को जी चाहता है l ओ सांवरे तुझे हद से भी ज्यादा, चाहने को दिल चाहता है l  तू जो करें मैं वो करुं, तू जहाँ जाये मैं वहाँ जाऊ l तू जो हँसे मैं भी हँसू, तू गाये तो तेरे संग गाऊ l ओ काले तेरी परछाई, बन जाने को जी चाहता है l ओ सांवरे तुझे हद से भी ज्यादा, चाहने को दिल चाहता है l  ऋतुओं में तू बसंत, मैं तेरी सुगंध बन जाऊ l तेरे बिन कुछ नहीं मैं, तेरे...